भगवद्गीता 8.23
Akshara Brahma Yoga · हिन्दी अनुवाद
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः | प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ||८-२३||
yatra kāle tvanāvṛttimāvṛttiṃ caiva yoginaḥ . prayātā yānti taṃ kālaṃ vakṣyāmi bharatarṣabha ||8-23||
इस श्लोक का अर्थ क्या है?
भगवान कृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि वे अब उन विशेष समयों और मार्गों का वर्णन करेंगे जिनके माध्यम से मृत्यु के बाद योगी लोग भक्ति या ज्ञान की अवस्था प्राप्त करते हैं। यह श्लोक दो प्रकार की गतियों (ययाति) को संदर्भित करता है: एक जहाँ आत्मा पुनः जन्म नहीं लेती (अपुनरावृत्ति), और दूसरी जहाँ वह फिर से इस भौतिक लोक में वापस आ जाती है। कृष्ण ने अर्जुन को 'भरतर्षभ' कहकर संबोधित किया है, जो दर्शाता है कि यह एक महत्वपूर्ण गुप्त ज्ञान है जिसे वे अब प्रकट करने वाले हैं।
इसके पीछे का सिद्धांत
यह श्लोक ज्ञान योग (Jnana Yoga) और उपदेश के उस भाग को जोड़ता है जो आत्मा की अमर प्रकृति और पुनर्जन्म के चक्र का विवरण देता है। यह 'अपुनरावृत्ति' (moksha/liberation) और 'आवृत्ति' (reincarnation) के सिद्धांतों को स्थापित करता है, जो संख्या (Sankhya) दर्शन की मूलभूत अवधारणाओं पर आधारित हैं। यह कर्मयोगी को यह समझने में मदद करता है कि अंतराल-काल का चयन आत्मा के अंतर्निहित संस्कारों और भक्ति से कैसे प्रभावित होता है।
शब्दार्थ
पारंपरिक भाष्य
यह कहाँ घटित होता है
यह श्लोक महाभारत के युद्धक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में स्थित है जहाँ भीष्म पितामह के मृत्युपश्चात् और अर्जुन की उदासी के बाद भगवान श्रीकृष्ण गीता का उपदेश दे रहे हैं। इससे ठीक पहले (अध्याय 8, श्लोक 20-22 में), कृष्ण ने 'परब्रह्म' और उसकी प्रकृति के बारे में बताया था। अर्जुन अब एक युद्धभूमि पर खड़े होकर इस जटिल सत्य को सुन रहे हैं कि मृत्यु का समय कैसे आत्मा की गति को निर्धारित करता है, जिसे जानना उनके लिए जीवन-मरण के संकल्प में मददगार होगा।
आज के जीवन में
मान लीजिए आप एक महत्वकर करियर डिसीजन (निर्णय) लेने वाले हैं या किसी गहरे व्यक्तिगत संघर्ष से गुजर रहे हैं, जहाँ आपको लगता है कि 'अब सब कुछ खत्म हो गया'। इस श्लोक का उपयोग यह समझने में करें कि आपकी वर्तमान स्थिति और आपके मन की शुद्धि (संस्कार) तय करेगी कि भविष्य के लिए क्या परिणाम मिलेंगे, चाहे वह मानव जीवन में आगे बढ़ना हो या नई शुरुआत। यह आपको इस बात पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है कि आप अपनी मृत्यु (या किसी अंत) की तैयारी कैसे कर रहे हैं और क्या आपके 'कर्म' सही दिशा में ले जा रहे हैं।
बच्चों के लिए सरल व्याख्या
कल्पना करो जैसे तुम स्कूल से घर वापस जा रहे हो और रास्ते में दो अलग-अलग गलियाँ मिलती हैं: एक सीधे अपने प्यारे घर (निरंतर शांति) की ओर, और दूसरी फिर से खेलने के मैदान (दुबारा जन्म) की। कृष्ण कह रहे हैं कि जब कोई बच्चा या व्यक्ति बहुत अच्छाई करता है, तो वह उसी समय का इंतज़ार कर रहा होता है जिससे उसे उन दो रास्तों में से एक चुनना पड़ेगा। अब तुम्हें बताऊँगे कि किस मौके पर कौन सा रास्ता मिलता है और कैसे हम सही रास्ते को पहचान सकते हैं।
दैनिक चिंतन
आज के दिन, आप खुद से पूछिए कि यदि अभी अंतिम समय हो जाए, तो क्या आपके विचार भगवान श्रीकृष्ण की ओर होंगे? इस श्लोक में काल (समय) और मार्ग का संबंध बताया गया है जो यह सिखाता है कि हमारा जीवन कैसे बीत रहा है, वह अंतिम क्षण को निर्धारित करता है। आप अपने हर छोटे-बड़े कार्य को ऐसे करें जैसे कि आपके उस 'अंत' के समय तक भक्ति की एक ज्योति बनी रहे।
आज के लिए एक अभ्यास
आज अपने मन को इस बात पर केंद्रित करें कि आपका अंतिम समय और मार्ग क्या है। प्रार्थना की भावना के साथ, शरीर त्यागने वाले योगियों के दो रास्तों—अपुनरावृत्ति (वापसी नहीं) या पुनरावृत्ति (वापसी)—के बारे में सोचें और अपने कर्मों को उस दिशा में सेट करें जहाँ ईश्वर का स्मरण बना रहे।
मुख्य शिक्षाएँ
- कर्म का अंतिम परिणाम और काल का महत्व
भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि मृत्यु के समय विचारों की दशा निर्धारित करती है कि व्यक्ति पुनः जन्म लेगा या मोक्ष प्राप्ता होगा। यह श्लोक हमें सिखाता है कि 'जो काल' में जीव को छोड़ना पड़े, वही उसका अंतिम मार्ग तय करता है। - योगियों के दो रास्ते: पुनरावृत्ति और अपुनरावृत्ति
इस श्लोक में योगियों के लिए दो गंतव्य बताए गए हैं: एक जहाँ से वापसी नहीं होती (अपुनरावृत्ति) और दूसरी जहाँ पुनः जन्म की प्रक्रिया चलती है। यह भगवान का संकेत है कि हमारा जीवन कौन सा रास्ता चुनें, इस पर निर्भर करता है। - अंत में ध्यान और समर्पण
श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि वह उन मार्गों को विस्तार से बताएंगे, जिसका तात्पर्य है कि अंतिम समय पर ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा और ध्यान की आवश्यकता है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन भर का साधना फल तभी मिलता है जब अंत में भगवान को स्मरण किया जाए।
विषय
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आगे पढ़ें
- 8.5 — इस श्लोक के तुरंत बाद भगवान विस्तार से बताते हैं कि मृत्यु के समय किस प्रकार की यादें मोक्ष का मार्ग बनाती हैं।
- 8.6 — यह श्लोक स्पष्ट करता है कि अंतिम क्षण में जो विचार आते हैं, वही उस व्यक्ति के भविष्य को निर्धारित करते हैं।
- 15.8 — भगवान ने जैसा कहा था कि वे वह काल बताएंगे, यह श्लोक जीव और प्रकृति के संबंध में गहराई से समझने की कुंजी है।
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