भगवद्गीता 15.6
Purushottama Yoga · हिन्दी अनुवाद
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः | यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ||१५-६||
na tadbhāsayate sūryo na śaśāṅko na pāvakaḥ . yadgatvā na nivartante taddhāma paramaṃ mama ||15-6||
इस श्लोक का अर्थ क्या है?
श्री कृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि जो परम धाम (सदगति) है, वह न सूर्य की रोशनी से प्रकाशित होता है और न चंद्रमा या अग्नि द्वारा। यह वह स्थान है जहाँ पहुँचकर कोई भी जीव फिर से इस भौतिक संसार में वापस नहीं आता। कृष्ण कहते हैं कि यह मेरा परम धाम है, जो सभी सूर्य-चंन्रा की रोशनी से भी अधिक उज्ज्वल और शाश्वत है।
इसके पीछे का सिद्धांत
यह उपदेश ज्ञान योग और भक्ति योग के संगम पर स्थित है, विशेष रूप से 'वैराग्य' (दुनिया की नफरत) और 'परमात्मा का स्वरूप' को समझने पर केंद्रित है। यह संख्या शास्त्र (Sankhya) के सिद्धांतों का विस्तार करते हुए बताता है कि भौतिक ज्ञान सूर्य या अग्नि की तरह बाहरी प्रकाश दे सकता है, लेकिन आत्म-ज्ञान ही वह अनंत प्रकाश है जो मोक्ष दिलाता है।
शब्दार्थ
पारंपरिक भाष्य
यह कहाँ घटित होता है
यह श्लोक महाभारत के युद्धक्षेत्र में, जब अर्जुन कौरवों से लड़ने की मानसिकता छोड़कर संदेह और दुख में डूबे हुए थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया। गीता के 15 अध्याय का प्रारंभ हुआ है जहाँ कृष्ण 'परम पुरुष' की आत्मा को एक विशाल बरगा (अश्वतथ) वृक्ष से तुलना करते हैं। अर्जुन अभी भी दुख और संकट के बीच थे, जबकि कृष्ण उन्हें मोह के इस वृक्ष को काटकर परम गति की ओर ले जाने वाले रास्ते में बता रहे थे कि वह स्थान क्या है जहाँ से वापसी नहीं होती।
आज के जीवन में
आज के समय में जब लोग करियर, पैसा और रिश्तों में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि मानसिक शांति खो देते हैं, तो यह श्लोक याद दिलाता है कि बाहरी चीज़ें (पैसे या पद) कभी पूर्ण सुख नहीं दे सकतीं। एक व्यक्ति जो केवल आत्म-ज्ञान और ईश्वर पर भरोसे में विश्वास करता है, वह तनाव और निराशा से मुक्त हो जाता है क्योंकि उसे पता होता है कि उसकी वास्तविक शांति बाहर की दुनिया से नहीं मिलेगी। जब कोई कठिन निर्णय लेने के लिए घबराता है या भविष्य को लेकर चिंतित रहता है, तो यह श्लोक उसे आंतरिक स्रोत (परम धाम) में खोजने का संकेत देता है जो कि बाहरी रोशनी से कहीं अधिक स्थायी और प्रकाशमान है।
बच्चों के लिए सरल व्याख्या
बेटा/बेटी, क्या तुम्हें कभी लगा है कि रात में चाँद या दिन में सूरज बहुत तेज़ चमकता है? लेकिन शरीर के बाहर एक ऐसी जगह भी है जो इन सभी से भी ज्यादा रोशन और सुंदर है। वहाँ पहुँचने पर तुम्हें कभी डर नहीं लगता, थकावट नहीं होती और फिर कहीं जाना पड़ना ही नहीं होता। वह हमारे स्वामी भगवान का घर है जहाँ सदा खुशियां रहती हैं।
दैनिक चिंतन
आप क्या सोचते हैं? अक्सर हम इस संसार के प्रकाश और सुखों में इतना खो जाते हैं कि भूल जाते हैं कि इन सभी सूर्य, चंद्रमा और अग्नि से भी अधिक शक्तिशाली एक परम धाम है। जब आप उस दिव्य स्थान की ओर मुड़ते हैं जहाँ पुनः आने-जाने का संसार नहीं है, तो आपके भय और मोह अपने आप मिट जाते हैं। यह जानना कि वही आपका अंतिम घर है, आपको आज ही शांति प्रदान कर सकता है।
आज के लिए एक अभ्यास
अपने अंतर को सूर्य, चंद्रमा और अग्नि के प्रकाश से परे स्थिर करें। कल्पना करें कि आप उस परम धाम की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ पुनः लौटने का कोई डर नहीं है, वही आपकी वास्तविक गृहस्थली है।
मुख्य शिक्षाएँ
- दिव्य धाम की महिमा
श्री कृष्ण बताते हैं कि उनका परम धाम सामान्य भौतिक जगहों से अलग है, जिसे न सूर्य का प्रकाश और न चंद्रमा या आग दिखा सकती है। यह एक ऐसा स्थान है जो सभी प्राकृतिक ऊर्जाओं के पार है और वहाँ की उज्ज्वलता स्वयं-विद्यमान है। - मोक्ष का वास्तविक अर्थ
इस श्लोक में 'ना nivartante' (पुनः लौटते नहीं) से स्पष्ट होता है कि परम धाम प्राप्ति के बाद जन्म-मरण की चक्रवाली प्रणाली समाप्त हो जाती है। यह वह अंतिम गंतव्य है जिहाँ आत्मा को फिर कभी संसार में अवतार लेना नहीं पड़ता। - भौतिक और दिव्य प्रकाश का विरोधाभास
यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि इस ब्रह्मांड के सभी स्रोत (जैसे आग या सूर्य) सीमित हैं, जबकि परम धाम की चेतना अनंत और निरंतर प्रकाशित होती है। यह समझने का समय है कि भौतिक रोशनी हमें दिशा देती है, लेकिन केवल दिव्य ज्ञान ही मुक्ति दिलाता है।
विषय
संबंधित श्लोक
आगे पढ़ें
- 15.7 — यह श्लोक बताता है कि जीवात्मा कैसे इस जगत के कर्मों से बंधी हुई है और पुनः उस परम धाम में वापस आने की प्रक्रिया को समझाती है।
- 2.15 — इसमें सुख-दुख के द्वंद्वों से विरक्त होकर स्थिर बुद्धि का वर्णन है, जो परम धाम की प्राप्ति के लिए आवश्यक मानसिक तैयारी है।
- 8.21 — इस श्लोक में 'अक्षर ब्रह्म' और उस अविनाशी स्थान का विस्तृत वर्णन किया गया है जो इस अध्याय के प्रमुख उद्देश्य को पूरा करता है।
अनुशंसित पुस्तकें
GitaQ earns from qualifying purchases as an Amazon Associate.